एमएसएमई को मिली संजीविनी का उद्योग जगत ने किया बांहें फैलाकर स्‍वागत, कहा मिलेगी सफलता

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कोरोना के संकट के बीच सरकार से एमएसएमई को मिले राहत पैकेज का उद्योग जगत ने बांहें खोलकर स्‍वागत किया है। उद्योग जगत का मानना है कि इन उद्योगों को इस समय जो संजीविनी सरकार ने दी है उसका आने वाले समय में जरूर फायदा दिखाई देगा। इन विशेषज्ञों का ये भी मानना है कि संकट के इस दौर में देश की गिरती अर्थव्‍यवस्‍था को संभालने के लिए ये जरूरी था कि ऐसे कदम उठाए जाएं जिससे इन्‍हें नई ऊर्जा मिल सके। आइए जानते हैं इस बारे में क्‍या है इन विशेषज्ञों की राय।

बजाज इंडस्ट्री (माइक्रो उद्योग) की अनु बजाज ने सरकार के इस वित्‍तीय की सराहना करते हुए कहा कि कोरोना ने अर्थव्यस्था की कमर तोड़ दी है। इससे छोटे बड़े विभिन्न उद्योगों की काफी नुकसान हुआ है। सरकार ने जो राहत पैकेज की घोषणा की है उससे अनिवार्य रूप से उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। इस घोषणा का सबसे अच्‍छा पहलू ये भी है कि सरकार ने एमएसएमई की परिभाषा को भी बदल दिया है ताकि उद्योग इकाइयों को उच्च निवेश के साथ-साथ टर्नओवर के मानदंड की अनुमति मिल सके। इस कदम से अधिक कंपनियों को राजकोषीय और अन्य लाभ प्राप्त करने के लिए छोटे व्यवसायों को रखने की अनुमति मिल सकेगी। सरकार ने निवेश के कार्यकाल को 4 वर्ष का रखा है और एमएसएमई को प्रस्ताव का लाभ उठाने के लिए 12 महीने की मोहलत दी है। अनु मानती है कि सरकार को ब्याज दर कम करनी चाहिए जिससे माइक्रो उद्योग इस राहत पैकेज का उचित उपयोग कर सकें।

रियल नेटवर्क्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के कंट्री हेड बिकास झा मानते हैं कि सरकार के इस पैकेज से MSME को अवश्य लाभ मिलेगा। अब उद्योग को घरेलू बाजार के लिए देखना होगा। लघु और मध्यम उद्योगों को अपने आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर ढांचे के सुधार के लिए पैसे खर्च करना होगा। जिससे इस घरेलू बाजार पर ध्यान दिया जा सके, अभी तक अपने आईटी उद्योग पर कभी ध्यान नहीं दिया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा है देश को आत्मनिर्भर बनना पड़ेगा, ऐसे में आईटी उद्योग को घरेलू बाजार सुधार के लिए उन्हें अपने उत्पादों को फिर से तैयार करना होगा और उन्हें उद्योग के लिए किफायती मूल्य पर बनाना होगा।

सेंट्रल सेकेटेरिएट सर्विसेज ऑफिसर्स सोसाइटी अध्यक्ष नेह श्रीवास्तव ने रियल एस्टेट सेक्टर और निर्माण को बढ़ावा देने वाली सरकार की योजना को एक बड़ा कदम बताया है। उनके मुताबिक वित्त मंत्री ने गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (एनबीएफसी), हाउसिंग फाइनेंस फर्मों (एचएफसी) और माइक्रोफाइनेंस संस्थानों (एमएफआई) के लिए 30,000 करोड़ रुपये की विशेष लिक्विडिटी स्‍कीम की घोषणा की, जिससे उन्हें ऋण सहायता मिल सके और बाजार में विश्वास पैदा हो सकेगा। इससे रियल एस्टेट उद्योग को एक बड़ी राहत मिली है। उनके मुताबिक यह आरबीआई द्वारा उठाए पिछले कदम का ही एक विस्‍तार है। सरकार की इस कोशिश को वो सराहनीय कदम मानते हैं।

सन रिजोल्यूशन प्रोफेशनल प्राइवट लिमिटेड के वित्त विशेषज्ञ और संस्थापक रामचंद्र चौधरी मानते हैं कि सूक्षम, लघु उद्योग और मझोले उद्योगों को ये पैकेज एक राहत की सांस है। उधोगो को जो भी लाखो करोड़ो का आर्थिक पैकेज दिया गया है उससे एक बार उद्योगों को रहत जरूर मिलेगी, परन्तु यह राहत भारत को आत्मा निर्भर बनाने में कितनी कारगर होगी यह समय बताएगा। विशेषकर जो भी राहत है वह अप्रत्यक्ष राहत है, जिसका असर लंंबेे अंतराल के लिए अच्छा होगा यह कहना मुश्किल है।

इस पैकेज के साथ सरकार को इस बात पर भी निगाह रखनी होगी कि जिस चीज के लिए कर्ज दिया जा रहा हो उसका लाभ और उपयोग सही जगह पर ही किया जाए। उनका मानना है कि इसका उद्योगों को लाभ तय समय सीमा में ही मिलना चाहिए। इसका लाभ उन उद्योगों को भी मिलना जरूरी है जो संकट में चल रहे हैं। चौधरी के मुताबिक इसके तहत केवल उन्हीं उद्योगों को सहायता दी जानी चाहिए जो देश को आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग की तरफ और रोजगार के अवसर प्रदान करने की तरफ कदम बढ़ा रहे हों।

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